कड़वा सच ......

सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

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धरती की आँख नम है...

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धरती की आँख शोक से संतप्त हो गई।

तलवार तेरी खून से जब तृप्त हो

………………………………………………………………..

 घृणा के बीज वो दी अवनि की कोख में,

लगता है की इंसानियत भी सख्त हो गई।

…………………………………………………………………

 धरती के लाल वो रहे फसलें विनाश की,

पावस तेरी करतूत से ही लुप्त हो गई।

………………………………………………………………….

 विज्ञान की देकर दुहाई खुद को क्योँ कोसता,

अच्छे-बुरे की सोच तेरी सुप्त हो गई।

……………………………………………………………………

 झूठ का बोलबाला है धोका है हर तरफ,

सच्चाई यहाँ हार के अब पस्त हो गई।

……………………………………………………………………

 आती नहीं है मौत भी मांगे से दोस्तों,

निर्धन की जिंदगी भी कमबख्त हो

…………………………………………………………………..

 “अंकुर” ने जब भी प्रेम की आवाज़ उठाई,

आवाज़ उसकी सींखचों में जप्त हो गई.

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41 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
November 20, 2012

वाह बहुत खूबसूरत अहसास हर लफ्ज़ में आपने भावों की बहुत गहरी अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है… बधाई आपको… सादर वन्दे…

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 8, 2013

    मदन मोहन जी, सादर- रचना पर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्.

shivnathkumar के द्वारा
May 18, 2012

अंकुर जी नमस्ते मन और दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ …. आज की जो विषद स्थिति है उसे आपने बखूबी उतारा है यहाँ सुन्दर रचना के लिए बधाई !!!!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 18, 2012

    शिव नाथ जी, सादर- आपको रचना पसंद आई आपका ह्रदय से आभार………..

shivnathkumar के द्वारा
May 18, 2012

मन और दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ …. आज की जो विषद स्थिति है उसे आपने बखूबी उतारा है यहाँ सुन्दर रचना के लिए बधाई !!!!

yamunapathak के द्वारा
May 13, 2012

अन्कुर्जी,बहुत अच्छी पंक्तियाँ पर अंतिम लाइन से मेरा एक सन्देश “यही एक भाषा है जो सबसे ज्यादा प्रभावी होता है.सींखचों में जब्त होकर भी लोगों को जोड़े रखता है.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीया यमुना जी सादर नमन- निरंतर समर्थन के लिए आभार……………………

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 12, 2012

प्रिय अंकुर जी , सस्नेह बहुत सुन्दर भाव दिए हैं. बधाई.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    परम सम्माननीय कुशवाहा जी, नमन- लगातार सकारात्मक समर्थन के लिए आभार………………….

satyavrat shukla के द्वारा
May 9, 2012

हनीफ जी बहुत ही अच्छी रचना है और शब्द चयन बहुत खूब है

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 10, 2012

    सत्यव्रत जी सादर- आपने रचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की आपका आभार…………………………….. आपसे अनुरोध ……………….आप निरंतर सहयोग बनाये रखें.

Madhur Bhardwaj के द्वारा
May 9, 2012

हनीफ भाई, नमस्कार क्या कहूँ आपकी कविता के सम्मान में, मुझे समझ में नहीं आ रहा है, फिर भी इतना कहूँगा कि आज के हालात का वर्णन करने का आपका यह अंदाज़ मन को छू गया! अदभुत हाँ मैं इसे अदभुत ही कहना उचित मानता हूँ! बहुत ही अनुपम कविता है! आती नहीं है मौत भी मांगे से दोस्तों, निर्धन की जिंदगी भी कमबख्त हो, “अंकुर” ने जब भी प्रेम की आवाज़ उठाई, आवाज़ उसकी सींखचों में जप्त हो गई. बहुत ही मर्मस्पर्शी भाव ! बहुत सुन्दर हार्दिक बधाई मधुर भारद्वाज

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 9, 2012

    मधुर भारद्वाज जी सादर- आपका हार्दिक आभार…………………..आप अगर मेरी बाकी कवितायेँ भी पढोगे तो आपको इससे ज्यादा चिंतन और साहित्य मिलेगा.

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 5, 2012

हनीफ भाई, नमस्कार क्या खूब लिखा है आपने…………..धरती की आँखें नम है…….. हालांकि धरती अब प्यासी बनती जा रही है…….

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    आभार प्रवीण जी-

shashibhushan1959 के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! एक खूबसूरत रचना ! “” घृणा के बीज बो दी अवनि की कोख में, लगता है कि इंसानियत भी सख्त हो गई”" यथार्थ भावनाएं ! हार्दिक बधाई !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    आदरणीय शशि भूषण जी- आपका आभार…………………

nishamittal के द्वारा
May 5, 2012

प्रभावी रचना अंकुर जी.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    दीदी जी, नमस्कार……………… आपका बहुत-बहुत आभार………………..

ashishgonda के द्वारा
May 5, 2012

क्षमा करें प्रशंसा के लिए शब्दकोश में शब्द कम हैं,,,,,,,,

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    अजय जी, ये आपका बड़प्पन है………………….आभार…………………

अजय कुमार झा के द्वारा
May 5, 2012

सुंदर सरल और भावप्रद रचना । शुभकामनाएं

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    अजय जी, आपका ……………….आभार…………………

akraktale के द्वारा
May 5, 2012

आदरणीय अंकुर जी नमस्कार, पर्यावरण और पाखण्ड पर सन्देश देती सुन्दर रचना बधाई.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 7, 2012

    आदरणीय भाई साहब नमस्कार- आपका आभार……………………………….

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 4, 2012

यथार्थ -बोध से संपृक्त भावपूर्ण रचना ! अंकुर जी, बधाई !!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 8, 2012

    आदरणीय विजय गुंजन जी- नमस्कार आपका आभार……………………………

yamunapathak के द्वारा
May 4, 2012

बहुत खूब हनीफ्जी इस धरती पर तलवार नहीं सुई बनना होगा जो जोड़ने का काम करे.दीवार नहीं पुल बनाने हैं .

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीया ज्योत्स्ना जी सादर नमस्कार- आपका आभार……………………

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीया यमुना जी- क्षमा चाहता हूँ गलती से आपके नाम के स्थान पर ज्योत्स्ना जी का नाम लिख दिया .

    jlsingh के द्वारा
    May 5, 2012

    यमुना जी की राय से पूर्ण सहमती के साथ आपके सुन्दर प्रस्तुति को बधाई!

jyotsnasingh के द्वारा
May 4, 2012

हनीफ अंकुर जी, अब खेतों में फसलों की जगह नफरतें और बदूकें बोई जाती हैं ,और जो बोया जाएगा वोही तो काटा जायेगा. शायद कभी इस इस मर्ज़ की दावा खुद बी खुद हो जाए ज़रा हद से गुज़र जाने दो.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    आदरणीया ज्योत्स्ना जी – दुरुस्त फ़रमाया आपने.

sanjay dixit के द्वारा
May 4, 2012

नमस्कार मित्र वर बहुत सुन्दर ,सार्थक व प्रासंगिक रचना ,बहुत अच्छा लगा ,धन्यवाद आपको

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    आभार दीक्षित जी- आप मेरी अन्य रचनाये भी पढियेगा.

चन्दन राय के द्वारा
May 4, 2012

हनीफ जी, मत दफन होने दिजिय अपनी आवाज दफन , हम आपकी आवाज दफन होने नहीं देंगे बहुत खूब भाव

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    चन्दन जी- ये आवाज़ हर आम आदमी की है जो या तो दबा दी जाती है या फिर कुचल दी जाती है.

vikramjitsingh के द्वारा
May 4, 2012

हनीफ जी…..सादर… सार्थक विचार…..सुन्दर अभिव्यक्ति…….

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    विक्रम जी …..नमस्कार- सहयोग के लिए आभार…………………………..

dineshaastik के द्वारा
May 4, 2012

सुन्दर  विचारों को अभिव्यक् त करती हुई  रचना की प्रस्तुति के लिये बधाई….

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 4, 2012

    आस्तिक जी- आभार………………………………………. निरंतर हौंसला अफजाई के लिए ……….


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