कड़वा सच ......

सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

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"माँ के आँचल की कसक का मोल न आँका जाये" (कुंडली छंद)

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(१)
माता इस संसार में, बच्चों की भगवान /
खुद तो वो भूखी रहे, हमको दे पकवान //
हमको दे पकवान, छांव आँचल की देती /
देती ज्ञान अपार, कुछ भी हमसे न लेती //
कहि अंकुर कविराय, माँ के क़दमों में जन्नत /
जो रखे माँ का मान, पूर्ण उसी की मन्नत //
***************************************
(२)
माँ आँचल का तेरे, मोल न आँका जाय /
बचपन में लाकर दिया, जो-जो मुझको भाय //
जो-जो मुझको भाय, सदा हित मेरा सोचा /
जब रोया तो आँख, से आंसू तूने पोंछा //
कहि अंकुर कविराय, थाह ममता की गहरी /
जानें सब ये बात, गांव का हो या शहरी //
*****************************************
(३)
कभी चुका न पाउँगा, माता तेरा क़र्ज़ /
क्षण भर में ही भांपती, माँ तू मेरा मर्ज़ //
माँ तू मेरा मर्ज़, तड़प जाती थी ऐसे /
बिन पानी के मीन, जगत में तड़पे जैसे //
कहि अंकुर कविराय, त्याग तेरा है निश्छल /
तेरे कारन भाग बना, मेरा है उज्जवल //
*****************************************
(४)
माँ अब तक भूला  नहीं, मैं वो काली रात /
जब नियति ने किया था, संग मेरे आघात //
संग मेरे आघात, अंग था मेरा छीना /
तब करूणा से फटा, मात था तेरा सीना //
कहि अंकुर कविराय, मार्ग का बनी सहारा /
तेरा साहस देख, कभी मैं भी न हारा //
*******************************************
(५)
रग-रग में जो रक्त है, है तेरी ही देन /
पीड़ा सहती तू रही, दिन हो या हो रेन //
दिन हो या हो रेन, प्रसव की पीड़ा झेली /
किए बहुत अपराध, डांट अब तक न पेली //
कहि अंकुर कविराय, सत्य का पाठ पठाया /
झूठ न भटके पास, साहसी शस्त्र थमाया //
********************************************
(६)
धरती-गगन-तारे-रवि, बिन माँ के बेकार /
जीवन बंजर सा लगे, सूना सब संसार //
सूना सब संसार, भाग को रचै विधाता /
संस्कार सिखलाय, जिंदगी रचती माता //
कहि अंकुर कविराय, धन्य माँ का है साया /
धन-दौलत बेकार, और है मिथ्या माया //
*********************************************
(७)
बेटा मेरा हो सही, हर माता की चाह /
रंच मात्र देती नहीं, अपने लाल को आह //
अपने लाल को आह, जिगर में उसे बिठाती /
माँ होने पर मंद-मंद, मन में मुस्काती //
कहि अंकुर कविराय, उपकार चुका न पाऊं /
निशि-वासर मैं तो बस, माँ के ही गुण गाऊं //
**********************************************
(८)
धरती पर मौजूद है, तरह-तरह के लोग /
माता से घृणा करे, लगता है जब रोग //
लगता है जब रोग, पत्नी पर जान लुटाते /
खुद ले छप्पन भोग, बाप-माँ को तरसाते //
कहि अंकुर कविराय, द्रग से नीर छलकता /
माँ की ममता से फिर भी, आशीष निकलता //
**********************************************
(९)
पहले भी नादान था, अब भी है नादान /
नादानी के फेर में, भूला माँ का मान //
भूला माँ का मान, कोख तुझको धिक्कारे /
जिसने सिंचित किया तुझे, तू उसको ही मारे //
कहि अंकुर कविराय, सुनो जगत कल्याणी /
भर दो ऐसा भाव, मृदु हो सबकी वाणी //
*********************************************
(१०)
गधा चराने एक दिवस, निकला मेरा यार /
खुद चरके घर आ गया, गधा था होशियार //
गधा था होशियार, यार मेरा था भोला /
दबा गया ह्रदय में , जलता आग का गोला //
कहि अंकुर कविराय, गधों से दूर ही रहिए /
सोच समझ कर बात, माँ के बारे में कहिए //
**********************************************
(११)
एक ज्ञानी ने कर दिया, एक अनौखा काम /
ममता को घायल किया, और किया बदनाम //
और किया बदनाम, ज्ञान है देता सबको /
मूर्खता पर उसकी, दया आती है हमको //
कहि अंकुर कविराय, अहम् उस पर है हावी /
ममता होती पाक, बताता फिरे खराबी //
**********************************************
(१२)
देना सदवुद्धि हमें, देना दाता ज्ञान /
हो न जाये भूल से, कहीं माँ का अपमान //
कहीं माँ का अपमान, बना दे शिष्टाचारी /
मांग रहा आशीष, हाथ फैलाए भिखारी //
कहि अंकुर कविराय, आस न टूटे स्वामी /
तेरा हूँ मैं दास, सुनो मम अंतर्यामी //
***********************************************

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aartisharma के द्वारा
August 10, 2012

बहुत ही भावनात्मक और दिल को छूने वाली कविता हे…. आभार

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 8, 2013

    उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद्.

May 15, 2012

देना सदवुद्धि हमें, देना दाता ज्ञान / हो न जाये भूल से, कहीं माँ का अपमान // बहुत ही भाव पूर्ण शब्द दिल को छू गई आभार

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    कुमार सौरभ जी, बस इसी प्रकार सहयोग बनाये रखियेगा.

May 15, 2012

सुन्दर कुण्डलियाँ अंकुर जी…बधाई…

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    कुमार गौरव जी, आपका आभार…………… निरंतर सहयोग बनाये रखियेगा.

alkargupta1 के द्वारा
May 13, 2012

sankhya 1 se lekar 12 tak ये sabhi कुण्डलियाँ bahit ही bhavpoorn va manohari lagi ankur kaviray ji shubhkaamnayen

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आपके आशीर्वाद से मेरी मेहनत सफल हो गई..

yamunapathak के द्वारा
May 13, 2012

कितनी सुन्दर कुण्डलियाँ बनी हैं और भाव मुझे सबसे अधिक ६ थी कुण्डली के लगे. बहुत सुन्दर

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आपका आभार यमुना जी……………………….

nishamittal के द्वारा
May 12, 2012

बहुत सुन्दर प्रस्तुतीकरण अंकुर जी.सब ही चंद भावपूर्ण हैं कभी चुका न पाउँगा, माता तेरा क़र्ज़ / क्षण भर में ही भांपती, माँ तू मेरा मर्ज़ // माँ तू मेरा मर्ज़, तड़प जाती थी ऐसे / बिन पानी के मीन, जगत में तड़पे जैसे //

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीया दीदी जी, सादर नमस्कार- आपका धन्यबाद…………………….

shashibhushan1959 के द्वारा
May 12, 2012

आधे अक्षर के पूर्व अगर कोई अक्षर हो तो वह आधा अक्षर एक मात्रा गिना जाएगा ! “धन्य-धन्य वे लोग, साथ में जिनके माता” ३ ३ २ ३ ३ २ ४ ४ = २४ “प्यार कहाँ ज़िंदा धरती पर ” ३ ३ ४ ४ २ = १६

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 12, 2012

    परम आदरणीय गुरु जी , बस इसी प्रकार मार्गदर्शन व आशीष प्रदान करते रहिएगा………….अब मैं अपनी सारी गलतियाँ सुधार लूँगा.

akraktale के द्वारा
May 12, 2012

अंकुर जी नमस्कार, धरती पर मौजूद है, तरह-तरह के लोग / माता से घृणा करे, लगता है जब रोग // लगता है जब रोग, पत्नी पर जान लुटाते / खुद ले छप्पन भोग, बाप-माँ को तरसाते // कहि अंकुर कविराय, द्रग से नीर छलकता / माँ की ममता से फिर भी, आशीष निकलता // बहुत सुन्दर छंद काव्य. बधाई.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय भाई साहब, नमस्कार- आपका आभार…………………………आप मुझे सहयोग प्रदान कर रहे है. बहुत अच्छा लग रहा है.

jlsingh के द्वारा
May 12, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर अभिवादन! आपकी हर पंक्ति अनमोल है साथ ही उत्प्रेक्षा अलंकार में कही गयी कुछ बातें भी विचारणीय है! जितनी भी प्रशंशा की जाय कम है! माँ तो बस माँ होती है!… बस इसी तरह प्रवाह जारी रहे!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 12, 2012

    आदरणीय जवाहर लाल जी- सादर, आपका सहयोग मिलता रहा तो प्रवाह जारी रहेगा. आपका आभार……………………………………….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 12, 2012

प्रिय अंकुर जी, सस्नेह बहुत सुन्दर प्रयास . आदरणीय शशि भूषण जी से मुझे भी मार्ग दर्शन प्राप्त होता है. बधाई.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 12, 2012

    परम आदरणीय कुशवाहा जी- चरण स्पर्श, आदरणीय शशि भूषण जी को तो मैंने अपना गुरु मान लिया है. क्यूंकि unme मुझे अपने विछुड़े हुए गुरु जी का प्रतिविम्ब नज़र आ रहा है. kintu mere liye aap bhi sammanniy है. आपकी प्रतिक्रिया से मुझे साहस मिलता है.

ajay kumar pandey के द्वारा
May 11, 2012

आदरणीय अंकुर जी सबसे पहले तो धन्यवाद की आप मेरे ब्लॉग पर आये और समर्थन दिया आपका आभार प्रकट करता हूँ और लेखन संपर्क बनाने की आशा करता हूँ आपने इस छंद में जो भावनाएं पिरोई हैं वह कम ही होती हैं आपका यह कुंडली छंद बहुत पसंद आया धन्यवाद

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    अजय जी सादर- विचारों का आदान – प्रदान व एक-दूसरे की प्रतिक्रियां ही हम लोगों को मनोबल बढाने का काम करती हैं. आप मेरे ब्लॉग पर आये आपका ह्रदय से आभार………………….

मनु (tosi) के द्वारा
May 11, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर नमस्कार ! बहुत ही सुंदर विवरण माँ की ममता का , प्यारी पंक्तियाँ ,सुंदर भाव!बधाई लें

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    मनु जी, सादर- आपने कुंडली की सराहना की आपका आभार. बस इसी प्रकार सहयोग बनाये रखियेगा.

shiromanisampoorna के द्वारा
May 11, 2012

आदरणीय ankur जी , सादर श्री radhe atisundar भावों के साथ shbd संरचना /सही बात तो केवल एक ही है कि माँ तो शब्दों से परे एक अनकहा एहसास है बहुत-बहुत बधाई…………………/

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    शिरोमणि जी , सादर नमस्कार- सबसे पहले तो आपका आभार की आप मेरे ब्लॉग पर आये और आपने मेरी रचना को सराहा. दूसरी बात ये की आप निरंतर सहयोग बनाये रखे तो अति कृपा होगी. आपका पुनः आभार…………………

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 10, 2012

वाह अंकुर कविराय जी……………निशब्द कर दिया आपने माँ की महिमा का क्या खूब बखान किया है आपने बहुत ही उत्कृष्ट रचना आपकी

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    आनंद प्रवीण जी नमस्कार- निरंतर सहयोग के लिए आपका आभार………………….

shashibhushan1959 के द्वारा
May 10, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ ! परन्तु क्षमाप्रार्थना के साथ एक निवेदन है कि इसमें जिस शब्द से शुरू किया जाता है, उसी पर समाप्त भी किया जाता है ! आपने पहली कुंडली “माता” शब्द से शुरू की है तो अंत भी इसी शब्द पर होना चाहिए……. “माता इस संसार में, बच्चों की भगवान / खुद तो वो भूखी रहे, हमको दे पकवान // हमको दे पकवान, छांव आँचल की देती / देती ज्ञान अपार, कुछ भी हमसे न लेती // कहि अंकुर कविराय, माँ के क़दमों में जन्नत / जो रखे माँ का मान, पूर्ण उसी की मन्नत”" . “माता इस संसार में, बच्चों की भगवान / खुद तो वो भूखी रहे, हमको दे पकवान // हमको दे पकवान, छांव आँचल की देती / भरती ज्ञान अपार, नहीं कुछ हमसे लेती // कहि अंकुर कविराय, बहुत अद्भुत यह नाता धन्य-धन्य वे लोग, साथ में जिनके माता !”" आशा है आप नाराज नहीं होंगे ! सभी कुण्डलियाँ भाव से भरी हैं ! शुरू से “अन्त” तक ! हार्दिक बधाई !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    परम आदरणीय गुरु जी, सादर चरण स्पर्श- आज आपने मेरी २० साल पुरानी याद ताजा कर दी, आप में मुझे अपने विछुड़े हुए परम आदरणीय गुरु जी श्री रमेश पाल सिंह जी मिल गये हैं. आपके सानिध्य में रहकर मेरी कलम अब और बलवती हो जाएगी. कुंडली में आपने जो गलती बताई है वो सही है. इससे पहले मुझे ये ज्ञान नहीं था. परन्तु अब आपने बता दिया है तो मैं इस बात का पूरा ध्यान रखूँगा. आपको क्षमा प्रार्थना के साथ नहीं बल्कि डांटकर मुझे मेरी गलती बतानी चाहिए थी. मैंने आपको अपना गुरु मान लिया है. इसलिए अब मेरी काव्य तुर्टियों आपको ही मेरी मदद करनी है. गुरु जी एक बात और बता दीजिये , क्या आधे अक्षर को भी एक मात्रा के रूप में गिना जाता है ?

May 10, 2012

जो अनमोल है उसका मोल लगाना तो एक बेईमानी है…………………..!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 11, 2012

    अलीन जी सादर नमस्कार- भाई साहब कहाँ गुम हो गए हो……………………………………… रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार……………….

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 10, 2012

माँ का आशीष प्राप्त कर ये कुंडली- छंद सिद्ध और सार्थक हो गए ! अंकुर जी, बधाई !! (तेरह और ग्यारह ) का ध्यान रखा कीजिये | खुदा हाफिज़ !!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 10, 2012

    विजय गुंजन जी- सादर, रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार…………………………… तेरह और ग्यारह मात्राओं को ध्यान में रखकर ही कुंडली-छंद लिखा गया है. कहीं किसी एक आध छंद में टाइपिंग के कारन मात्राएँ घट-बड़ हो गयीं हो तो कह नहीं सकता. बैसे पूरा ध्यान रखा गया है. आपने सचेत किया आपका शुक्र-गुजार हूँ.

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 10, 2012

हनीफ जी नमस्कार, कवि महोदय, आपने सुन्दर कविता प्रस्तुत की है. बधाई……

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 10, 2012

    अजय जी नमस्कार- ये तो सब माँ के आशीर्वाद का प्रतिफल है और आप जैसे मनीषी व्यक्तिओं की सोहबत का असर है. आपका ह्रदय से आभार………………………..

चन्दन राय के द्वारा
May 10, 2012

अंकुर मित्र , माँ को समर्पिर बहुत ही सुन्दर कुंडली छंद कविता भाव से परिपूर्ण , में भी आपके मंच पर थोडा इसमें स्वर मिला दूँ , मेरे कंठ से फूटता सबसे पुण्य पवन उच्चारण है माँ

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 10, 2012

    भाई चन्दन जी- आपकी इस पंक्ति को पूर्ण में किये देता हूँ- मेरे कंठ से फूटता सबसे पुण्य पावन उच्चारण है माँ / जग में सारे कष्टों का सिर्फ निवारण भी है माँ // रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार……………….

hina के द्वारा
May 10, 2012

सर जी नमस्ते- मदर्स डे के उपलक्ष्य में शानदार काव्य कुंडली के लिए बधाई . सच में एक एक कुंडली प्रेरणादायक है.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 10, 2012

    स्नेही रश्मि खुश रहो- रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार…………


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