कड़वा सच ......

सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

23 Posts

664 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10082 postid : 66

"जगा दिया है जे. जे. ने माँ का प्यार उरों में" (गीत)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

**

*************************************

है समर्पित मदर्स डे पर, ममता का ये गीत !

आप सबसे मिल जायेगा, इस गीत को संगीत !!

*************************************

जे. जे.  के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

जगा दिया है जे. जे.  ने, माँ का प्यार उरों में !

ममता की माला में पिरोकर, ढाल दिया है सुरों में !!

जो माँ का अहसान न माने, सबसे बड़ा वो दागी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

बड़े प्यार से मुझको पाला, दूध पिलाया आँचल का !

नज़र कहीं लग जाये मुझे न, तिलक लगाया काजल का !!

मुझे सुलाने की खातिर, वो रात-रात भर जागी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

हे भगवन शक्ति अपार दे, गगन झुका दूँ चरणों में !

वात्सल्य और ममत्व घोल दूँ, मैं सूरज की किरणों में !!

तब समझूंगा की तू भी, माँ से बड़ा त्यागी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

दूध नहीं अमृत सीने से,  तूने मुझे पिलाया है !

बांध के अपने पेट से पत्थर, भर पेट मुझे खिलाया है !!

दुआ सदा हित में मेरे ही,  तूने ही तो मांगी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

अमृतमय एहसास है माँ, संकट मोचन आभास है माँ !

विस्तृत विशाल आकाश है माँ, जग में सबको ख़ास है माँ !!

भटके राही की आस है माँ, माँ सबसे बड़ी अनुरागी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

.

अपने बच्चों को ढाल है माँ, दुष्टों की खातिर काल है माँ !

प्यासे प्राणी की प्यास है माँ, धन्य हूँ की मेरे पास है माँ !!

माँ की महिमा उनसे पूंछो, जो ममता में बैरागी है !

जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है !

याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !!

*******************************************

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

76 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

मनु (tosi) के द्वारा
May 21, 2012

अंकुर जी लाजवाब निशब्द हूँ मैं स्तब्ध हूँ मैं ….. अपने बच्चों को ढाल है माँ, दुष्टों की खातिर काल है माँ ! प्यासे प्राणी की प्यास है माँ, धन्य हूँ की मेरे पास है माँ !! माँ की महिमा उनसे पूंछो, जो ममता में बैरागी है !… आपके पास ये खजाना सदा रहे … यही दुआ है

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 23, 2012

    मनु जी, सादर- रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार………………………

Rahul Nigam के द्वारा
May 19, 2012

धन्यवाद उत्साहवर्धन के लिए. विकल्पहीन ‘माँ’ के प्यार, दुलार और लालन-पालन को लिपिबद्ध करने के लिए सागर का जल स्याही के लिए और ब्रम्हांड के पेड़ कलम व कागज़ के लिए समाप्त हो जायेंगे पर माँ का प्यार कभी खत्म नहीं होगा. फिर भी आपके द्वारा माँ के चरणों में कुछ शब्दों को खूबसूरती से चढ़ाना काबिलेतारीफ है. किसी ने सच ही कहा है:- “ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवन की सूरत क्या होगी.”

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 20, 2012

    आदरणीय राहुल निगम जी, अक्षरशः आपकी बात से सहमत हूँ. रचना पर प्रतिक्रिया व समर्थन के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ…………………..

radhika DWIVEDI के द्वारा
May 16, 2012

बहुत सुंदर कविता अति उत्तम………………

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    राधिका जी, परस्पर सहयोग व समर्थन के लिए आपका आभार………………………

May 16, 2012

ऐसी कोई बात नहीं है जनाब……आप इतनी जल्दी-जल्दी पोस्टिंग कर रहे हैं कि पढ़ने का वक्त भी चाहिए….वैसे आपकी माँ के ऊपर लगातार दो रचना आ चुकी है. अतः सोचा कि चलिए एक पर तो कमेन्ट कर दिया हूँ . इसी से काम चल जायेगा..थोडा आज कल व्यस्त ज्यादा हूँ…अपनी किताब पूरी करने में लगा हूँ…वैसे भी ऑफिस के काम से कम फुरसत मिलता हैं…आगे से आपकी बात ध्यान रखूँगा…..आपकी कृति कमाल की होती हैं इसमे तो कोई शक नहीं…बहुत अच्छा लगता है आप जैसे व्यक्तियों का साथ होना …..कृपया किसी भी प्रकार की ग़लतफ़हमी न पालें……एक बार फिर आपकी इस कृति के लिए हार्दिक आभार…..रास्ट्रीयस्तर के कवि महोदय…….हाँ…..हाँ….हाँ….!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    अलीन जी सादर नमस्कार- जानकर बड़ी ख़ुशी हुई कि आप अपनी किताब में व्यस्त है. आपके लिए मेरी शुभकामनायें कि आप कि किताब का कार्य शीघ्र संपन्न हो और हम लोगों को पड़ने के लिए मिले. बैसे किस विषय पर लिख रहे है आप. आपका आभार …………… आपने मेरी भावनाओं को समझा..

    May 16, 2012

    जी प्रेम विषय है मेरा…….वो भी मेरी प्रेम कहानी…..शायद आपको पसंद नहीं आएगी ……हाँ….हाँ….हाँ…! यदि पसंद आएगी तो लीजिये अडवांस में पढ़ लीजिये…..! http://merisada.jagranjunction.com/2012/02/15/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%b8/

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    अनिल जी, मैंने आपकी किताब को पद लिया है. बहुत ही मार्मिक कहानी लिखी है आपने.

    May 16, 2012

    जी मार्मिक कहानी मैंने नहीं लिखी है, ज़माने की परम्पराओं और मर्यादाओं ने लिखी हैं. हमपर तो बस गुजरी है. आपको मेरी दर्द भरी प्रेम कहानी पढ़कर मजा आया इससे बढ़कर मेरे लिए क्या हो सकता है ….आपका हार्दिक आभार…….मैं चाहता हूँ कि यह लिंक आप अपने चाहने वालो को भी भेज दे ताकि वो लोग भी मजा ले ले. आख़िरकार अकेले मजा लेना अच्छी बात नहीं….हाँ……हाँ….हाँ….!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 17, 2012

    अनिल जी, नमस्कार- मेरी कही हुई बात का अगर आप को बुरा लगा है तो माफ़ी चाहता हूँ. किन्तु मेरे कहने का तात्पर्य कुछ और ही था. आपने जो आप बीती कहानी लिखी वो बाकई में बहुत करुण है. आपकी इस कहानी को पड़कर मैंने एक ग़ज़ल लिखी है, जिसे पोस्ट कर रहा हूँ. आप जरुर पढियेगा.

minujha के द्वारा
May 15, 2012

अमृतमय एहसास है माँ, संकट मोचन आभास है माँ ! विस्तृत विशाल आकाश है माँ, जग में सबको ख़ास है माँ !! भटके राही की आस है माँ, माँ सबसे बड़ी अनुरागी है ! आपकी ये पंक्तियां मुझे बहुत अच्छी लगी अंकुर जी,काश हर संतान इस एहसास को महसूस कर पाती………

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    मीनू झा जी, आपका ह्रदय से आभार……………………………इस बार आप बहुत विलम्ब से आयीं मेरे ब्लॉग पर.

May 15, 2012

अंकुर जी नमस्कार अपने बच्चों को ढाल है माँ, दुष्टों की खातिर काल है माँ ! प्यासे प्राणी की प्यास है माँ, धन्य हूँ की मेरे पास है माँ !! बहुत ही भाव पूर्ण शब्द दिल को छु गई कृपया मेरा नवीनतम ब्लाग पढने का कष्ट करें

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    कुमार शौरभ जी, नमस्कार- आभार आपका…………………………………………………………………….. मैंने आपका ब्लॉग पड़ लिया है……

चन्दन राय के द्वारा
May 15, 2012

हनीफ जी नमस्कार… माँ और J.J. BLOG दोनों को आपने सुन्दर शब्दों से नावाजा है , माँ को कहे आपके लब्ज आकी सुन्दर भावना की तरह ही पवित्र है , मित्र देर हो जाये पर घबराये मत , में आपके मंच पर जरुर आऊंगा

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    मित्र चन्दन, “मुझे तुम्हारा ये अंदाज़ पसंद आ गया ! ह्रदय में ख़ुशी का गुबार छा गया !! मित्र बहुत-बहुत आभार………………………….

sinsera के द्वारा
May 15, 2012

हनीफ जी नमस्कार… माँ को समर्पित सुन्दर विचार…….. बधाई……. हाँ एक बात…आप को किसी व्यक्ति से के व्यवहार से शिकायत है तो उस पर एक ब्लॉग लिख दीजिये तो सब लोग पढ़ लें गे..या जे जे फीडबैक पर शिकायत कीजिये…..ऐसे हर कमेन्ट के नीचे लिखें गे तो कोई व्यक्तिगत कार्यवाही तो करेगा नहीं…खामखा में आप की कमेन्ट संख्या ही बढ़ेगी…. आशा है अन्यथा नहीं लें गे……..

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    सरिता जी , सादर नमस्कार- मुझे जिस व्यक्ति से शिकायत थी, मैंने उसे खुद सबक सिखा दिया है. लेकिन वह व्यक्ति अब दूसरे लोगों की भावनाओं को आहत करने का काम कर रहा है. आप उसे भली भांति जानती है. मैं लोगों को व्यक्तिगत रूप से सचेत कर रहा हूँ. ताकि लोग उसे करार जवाव दे और वह फिजूल बकबास बंद कर दे. यदि आप बुरा न माने तो आप से एक बात कहूँ. ……… मुझे आपसे एक शिकायत है. आप मेरे ब्लॉग पर बहुत कम आती हो. जब मैं आपको आमंत्रित करता हूँ तभी आतीं है आप………. आपने रचना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की बहुत अच्छा लगा………….आपका आभार……………….

hina के द्वारा
May 15, 2012

सर जी, namaste- आपकी ये कविता मुझे बहुत अच्छी लगी.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    हिना, शुक्रिया……………………………

shivnathkumar के द्वारा
May 14, 2012

अमृतमय एहसास है माँ, संकट मोचन आभास है माँ ! विस्तृत विशाल आकाश है माँ, जग में सबको ख़ास है माँ !! भटके राही की आस है माँ, माँ सबसे बड़ी अनुरागी है ! हर एक पँक्ति काफी सुंदर …. अत्यंत सुंदर रचना !!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    शिव नाथ जी, सादर- आपने रचना को पड़ा और सराहना की आपका आभार………… आप मेरी अन्य रचनाएँ भ पढियेगा.

    hina के द्वारा
    May 15, 2012

    सर bahut अच्छा लिखते हैं.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 18, 2012

    हिना, यूँ ही मेरी झूठी तारीफ मत करो……………………………..

आर.एन. शाही के द्वारा
May 14, 2012

माँ पर बहुत उम्दा कविता प्रस्तुत की है अंकुर जी । बधाइयाँ स्वीकार करें ।

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    शाही जी, सादर नमस्कार- सबसे पहले तो आप एक और बधाई स्वीकार करे…………………. आज दैनिक जागरण , जे. जे के कालम में आपका आलेख देखा इसके लिए……………… दूसरा – आपना मेरी भावनाओं को समझा और मेरे ब्लॉग पर आये. इसके लिए आभार……………….आशा करता हूँ की आप मुझे निरंतर समर्थन देते रहेंगे व मेरा समर्थन लेते रहेंगे.

    hina के द्वारा
    May 15, 2012

    सर की ओर से main भी आपको धय्न्दबाद देती हूँ..

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 18, 2012

    हिना, यूँ ही मेरी झूठी तारीफ मत करो.

yogi sarswat के द्वारा
May 14, 2012

अपने बच्चों को ढाल है माँ, दुष्टों की खातिर काल है माँ ! प्यासे प्राणी की प्यास है माँ, धन्य हूँ की मेरे पास है माँ !! माँ की महिमा उनसे पूंछो, जो ममता में बैरागी है ! जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है ! याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है ! बहुत ही सुन्दर रूप में माँ के प्रति हृदय में उमड़ी वात्सल्य पूर्ण भावाभिव्यक्ति के रूप में जे जे का आभार व्यक्त किया है…… पर इतनी प्यारी माँ के लिए तो हर दिन ही उनके लिए समर्पित होना चाहिए ! शुभकामनाएं

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 14, 2012

    योगी जी सादर, आपका कोटिस आभार…………….

krishnashri के द्वारा
May 14, 2012

आदरणीय अंकुर जी , सादर , भावनाओं को शब्दों का बाना पहनाने में आप माहिर हैं . आपके माँ के प्रति प्रेम को मेरा नमन .

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 14, 2012

    कृष्ण श्री जी, सादर- ये सब तो आपके आशीष का नतीजा है…………………. आभार…………………………………………………

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 13, 2012

दूध नहीं अमृत सीने से, तूने मुझे पिलाया है ! बांध के अपने पेट से पत्थर, भर पेट मुझे खिलाया है !! दुआ सदा हित में मेरे ही, तूने ही तो मांगी है ! प्रिय अंकुर जी बहुत सुन्दर ..सच में माँ की महिमा सभी दिलों में जाग उठी ..यादें ताजा हो गयीं ..जे जे को आभार और आप को बधाई … भ्रमर ५

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 14, 2012

    भ्रमर जी, सादर नमस्कार- आपका आशीर्वाद मिला अत्यंत प्रसन्नता हुई………………आभार……………….

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीय भ्रमर जी, सादर- कुछ लोगों द्वारा मंच पर फिर से मर्यादाओं को भंग करने का काम शुरू कर दिया गया है.. इन पर अंकुश जरुरी हो गया है.

Santosh Kumar के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय हनीफ अंकुर जी ,.सादर अभिवादन भावनाओ की बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति …बहुत बधाई

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 14, 2012

    संतोष कुमार जी , सादर नमस्कार- हौंसला अफजाई के लिए धन्यवाद………………………………..

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीय संतोष जी- जो लोग इस मंच की मर्यादाओं को दूषित कर रहे है. इन पर कोई ऐसा व्यंग लिखिए की इनकी तबियत हरी हो जाये.

    Santosh Kumar के द्वारा
    May 15, 2012

    कृपया इनका लिंक दीजिये ,..वैसे इनके लिए गुरुदेव ही पर्याप्त हैं ,..बच्चों को चिंता करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए

Piyush Kumar Pant के द्वारा
May 13, 2012

बड़े प्यार से मुझको पाला, दूध पिलाया आँचल का…….. नज़र कहीं लग जाये मुझे न, तिलक लगाया काजल का….. सुन्दर अभिव्यक्ति……..

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 14, 2012

    पियूष पन्त जी, सादर- समर्थन के लिए कोटिश धन्यवाद………………………

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    पियूष जी, यहाँ कुछ ऐसे लोग भी हैं लो आपको हतोत्साहित करने का काम करेंगे. पर आप जरा भी बिचलित मत होना.

    hina के द्वारा
    May 15, 2012

    पियूष भैया, आप मेरी कविता भी पढियेगा.

    Piyush Kumar Pant के द्वारा
    May 20, 2012

    हानिफ जी………. आप हमारे विचलित होने की परवाह न करें…….. हम बहुत पुराने चाँवल है…… हम किसी की किसी बात से उत्साहित नहीं होते तो किसी की बात से हतोत्साहित होने का प्रश्न ही नहीं……. आप अच्छा लिखते हैं….. इसलिए आप पूरा ध्यान लिखने मे लगाएँ……. .

RAHUL YADAV के द्वारा
May 13, 2012

हनीफ जी नमस्कार… उत्कृष्ट रचना पाकर बहुत खुशी हुई….ऐसे ही हमारा मार्गदर्शन करतें चलें।………….धन्यवाद।

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    राहुल जी, इस मंच पर हम सब सीखने और सिखाने के लिए ही तो आये है. विचारों का आदान प्रदान हमें एक दूसरे जोड़े रखेगा. मदर्स डे की शुभकामनायें…………………..

akraktale के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय अंकुर जी नमस्कार, दूध नहीं अमृत सीने से, तूने मुझे पिलाया है ! बांध के अपने पेट से पत्थर, भर पेट मुझे खिलाया है !! दुआ सदा हित में मेरे ही, तूने ही तो मांगी है ! मदर्स डे पर आपकी प्रस्तुति सराहनीय है. बधाई.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीय भाई साहब, सादर नमन- सबसे पहले आपको मदर्स डे की शुभकामनाये. रचना पर प्रतिक्रिया के लिए आभार……………………………….

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    भाई साहब, बहुत ही ग्लानी हो रही है की मंच पर फिर से कुछ लोगों द्वारा मर्यादाओं को सरेआम नीलाम किया जा रहा है.

alkargupta1 के द्वारा
May 13, 2012

हनीफ जी , माँ का वात्सल्य अवर्णनीय व अतुलनीय है……माँ के चरणों में तो ज़न्नत है….. बहुत ही सुन्दर रूप में माँ के प्रति हृदय में उमड़ी वात्सल्य पूर्ण भावाभिव्यक्ति के रूप में जे जे का आभार व्यक्त किया है…… पर इतनी प्यारी माँ के लिए तो हर दिन ही उनके लिए समर्पित हो…..शुभकामनाएं !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    परम आदरणीया अलका जी, सादर नमन- आप मेरे ब्लॉग पर आयीं और आपने आशीर्वाद दिया …. आपका आभारी हूँ. बस इसी प्रकार आशीष प्रदान करती रहिएगा.

rekhafbd के द्वारा
May 13, 2012

अंकुर जी , बचपन याद दिलाने पर जे जे मंच का आभार और आपको अति सुंदर रचना पर बधाई |

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    सम्माननीया रेखा जी, सादर नमन- मदर्स डे पर आपको शुभकामनायें. मेरी अन्य रचनाएँ भी आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है.

shashibhushan1959 के द्वारा
May 13, 2012

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! इसे ही कहेंगे “एक तीर दो निशाने” ! बहुत सुन्दर ! माता के प्रति स्नेह और प्रेम प्रदर्शित करने के साथ जे जे के प्रति भी आभार ! वास्तव में इसके लिए हमको जे०जे० का आभार मानना ही चाहिए ! (क्षमा के साथ निवेदन है रचना को एक बार पुनः पढ़ें ! जो अटकाव है उन्हें ठीक करें !) हार्दिक बधाई !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    गुरु जी, नमन- जी, अवश्य ठीक करूँगा. मदर्स डे की शुभकामनायें.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    गुरु जी, सादर नमन- मंच पर कुछ लोग फिर से मर्यादाओं को भंग करने का काम करने लगे है. इन पर अंकुश लगाना बहुत जरुरी हो गया है.

    shashibhushan1959 के द्वारा
    May 16, 2012

    अंकुर जी, इन मक्खी – मच्छरों से इतना परेशान मत होइए ! ये सब मौसमी कीड़े-मकोड़े हैं ! समय से नष्ट हो जायेंगे ! लेखन पर ध्यान रखें !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 16, 2012

    आदरणीय गुरु जी, नमन- उचित मार्गदर्शन व दिमाग को तरोताजा करने के लिए धन्यबाद….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 13, 2012

निश्चित रूप से जे जे ने मां का प्यार जगा दिया है. व्यस्त जिन्दगी में प्रति क्षण मां याद नहीं आती है, लेखक की इस पकड़ हेतु बधाई

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    परम सम्माननीय कुशवाहा जी , नमन- बिलकुल सही कहा आपने , जे. जे ने ही ये अवसर प्रदान किया है. आपका और जे. जे दोनों का आभारी हूँ.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    सम्माननीय कुशवाहा सर, बड़े अफ़सोस के साथ कह रहा हूँ की कुछ तत्वों द्वारा फिर से मंच का माहौल बिगाड़ने का काम शुरू कर दिया गया है. इन पर अंकुश लगाना जरुरी है.

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 13, 2012

अब आपतो कहर ढा रहें हैं हनीफ भाई…………इतनी जोरदार लिखेंगे तो हम कमेन्ट देने में भी असमर्थ हो जायेंगे…………….वाह वाह

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    प्रवीण जी, सादर! ये तो आप लोगों के लगातार मिल रहे समर्थन का नतीजा है…………………. हौसला अफजाई के लिए ह्रदय से आभार…………………..

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    आनंद जी, बड़े अफ़सोस के साथ कह रहा हूँ की कुछ तत्वों द्वारा फिर से मंच का माहौल बिगाड़ने का काम शुरू कर दिया गया है. इन पर अंकुश लगाना जरुरी है.

yamunapathak के द्वारा
May 13, 2012

अनुपम जे.जे.मंच के इन प्रसंशनीय पहलुओं ने ही तो इसे जन-जन से जोड़ दिया है.आपने सही अभिव्यक्ति दी है. मुझे सबसे अच्छी बात इस मंच पर यही लगती है की हम आम जनता जिन संस्कारों और मूल्यों से जुड़े हैं इस सम्मानित मंच ने उन सारे मूल्यों को साझा करने के लिए हमें एक platform दिया है.जो भी लोग इस मंच पर ब्लॉग पढ़ते हैं ,उन्हें अपनी संस्कृति,इतिहास,गौरव,आम जनता से जुडी समस्याएं,उन्हें हल करने के तरीके,आदि समझाने में कितनी आसानी हो जाती होगी.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आदरणीया जमुना जी, सादर नमन- बिलकुल सही कहा आपने………………….जे. जे. का मैं आभारी हूँ. उचित मंच और प्रशंशक न मिल पाने के कारन मेरी कलम पिछले कई दिनों से खामोश थी. किन्तु जब से जे. जे. पर ब्लॉग बनाया है तब से कलम ने रफ़्तार पकड़ ली है. और आप लोगों का समर्थन मेरी खामोश कलम के लिए प्रोत्साहित करने का काम कर रहा है. मैं आपका भी आभारी हूँ. आप से निवेदन करता हूँ की आप निरंतर सहयोग प्रदान करती रहे.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीया जमुना जी, सादर नमन- बड़े अफ़सोस के साथ कह रहा हूँ की कुछ तत्वों द्वारा फिर से मंच का माहौल बिगाड़ने का काम शुरू कर दिया गया है. इन पर अंकुश लगाना जरुरी है.

nishamittal के द्वारा
May 13, 2012

आपसे पूर्णतया सहमत हूँ अंकुर जी,यद्यपि माँ की महिमा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन का केवल एक ही दिन नहीं है,परन्तु जे जे के इस आह्वान पर सबको अपनी जननी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पण करने का अवसर मिला ,जोश जगा.आपने अपनी भावनाएं एक सुन्दर रचना के साथ प्रस्तुत की.

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    दीदी जी सादर नमन- बिलकुल सही कहा आपने माँ के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन का एक ही दिन नहीं है, माँ की कृतज्ञता का वर्णन यदि दिन रात भी करे तो कम है. आभार……………………………

jlsingh के द्वारा
May 13, 2012

मुझे सुलाने की खातिर, वो रात-रात भर जागी है ! जे. जे. के इस मंच पे यारो, याद पुरानी जागी है ! याद आ गया हमको बचपन, और जवानी भागी है !! प्रिय अंकुर जी, आपने फिर से माँ की याद ताजा कर दी! आज ‘मदर्स डे’ पर आपको शुभकामना और बधाई!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    जवाहर लाल जी,सादर- मदर्स डे पर आपको भी सुभकामनाये……………………………

dineshaastik के द्वारा
May 13, 2012

अंकुर जी बहुत ही सुन्दर, मां के प्रति भाव पूर्ण  उदगार……

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 13, 2012

    आस्तिक जी सादर नमन- मदर्स डे की शुभकामनाये……………………………

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    May 15, 2012

    आदरणीय आस्तिक जी, नमस्कार- आपने संदीप से क्षमा क्यूँ मांगी, मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. मैं जानता हूँ की उसने आपकी ही नहीं बल्कि बहुत से रचनाकारों की भावनाओं को आहत किया है. उसने आपकी भावनाओं को भी आहत किया और आपने ही उससे क्षमा मांग ली. मंच से इसे व्यक्ति का तिरस्कार होना चाहिए.


topic of the week



latest from jagran