कड़वा सच ......

सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

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लाशें गिनता रह जायेगा........

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दुश्मन को जाकर देहला दे,

और उसे बतला देना.

हिन्द देश वीरों की भूमि,

यह उसको जतला देना..

जब हम धरते हैं रूप विकट,

तो मौत भी थर्रा जाये.

इतिहास हमारे वीरों का,

सारी दुनियां के मन भाये..

कायरता का कृत्य किया,

तूँ बार पीठ पर करता है.

हिम्मत है तो सामने आ,

क्योँ बिल से हुंकारें भरता है..

तूँ किस खेत की मुली पाकिस्तान,

तुझे सबक पुनः सिखलाएंगे.

एक बार फिर इतिहास ७१ का,

इस दुनियां में दोहराएंगे..

तूँ मान नहीं तो मनवा लेंगे,

तुझको जिंदा दफना देंगें.

तूँ पैर हटा एल ओ सी से,

नहीं पैर तेरा कटवा देंगे..

हम हैं उदार कायर न समझ,

हम संतो की संतानें है.

मातृभूमि पर मरने वाले,

हम मौत के वो परवाने हैं..

खून का बदला खून से लेंगे,

इतिहास लहू से लिख देंगें.

तूने काटा है एक शीश,

बदले में हम सौ- सौ लेंगे..

हे नादान संभल नहीं तो,

करनी पर पछतायेगा.

काश्मीर के चक्कर में,

लाशें गिनता रह जायेगा..

……………………..

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 12, 2014

श्री हनीफ जी वीर रस की खूबसूरत कविता डॉ शोभा

yatindrapandey के द्वारा
January 26, 2013

हैलो सर बहुत ही जोशीला कृत है, इन्हें तो सबक सीखना ही पड़ेगा. यतीन्द्र

rekhafbd के द्वारा
January 25, 2013

अंकुर जी हम संतो की संतानें है. मातृभूमि पर मरने वाले, हम मौत के वो परवाने हैं.. खून का बदला खून से लेंगे,जोश से भरी हुई रचना पर हार्दिक बधाई

minujha के द्वारा
January 24, 2013

अंकुर जी जायज आक्रोश,अच्छी रचना बधाई

seemakanwal के द्वारा
January 24, 2013

ओजपूर्ण रचना .बधाई

aman kumar के द्वारा
January 24, 2013

बहुत अच्छी कविता ! आपको शुभ कामनाये !

alkargupta1 के द्वारा
January 24, 2013

अंकुर जी , इस सुन्दर ओजपूर्ण आह्वान के लिए बधाई भारत माता की जय !

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 21, 2013

हनीफ भाई अस्सलाम वालेकुम, बहुत सुन्दर पोस्ट. मुबारकबाद. सांप की प्रकृति क्या होती है, सभी जानते हैं, लेकिन यदि वह भी फुन्कारना छोड़ दे, तो लोग उसे पत्थर, रोड़े मार-२ कर मार ही देंगे, या फिर उसे अपनी जान बचाते भागना पड़ेगा. हमारे पास इतनी ताकत है कि हम अच्छे-२ के छक्के छुड़ा दें, लेकिन हमने फुन्कारना भी छोड़ रखा है. उदारता और शांति के साथ भी समय-२ पर फुन्कारना हमारी सेहत के लिए अच्छा होगा. हमारे नीति नियंता यह शायद भूले बैठे हैं. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 22, 2013

    वालेकुम अस्सलाम, तुफैल भाई, मैं आपकी बात से सहमत हूँ. शुक्रिया.

vasudev tripathi के द्वारा
January 20, 2013

हनीफ भाई, आपकी इस कविता के प्रत्येक शब्द से राष्ट्रप्रेम का ज्वालामुखी फूटता है जिसके प्रत्येक भाव को नमन.! यदि आप मुस्लिम हैं तो आप सच्चे मुस्लिम हैं जैसा कि होना चाहिए। हाँलाकि जब व्यक्ति अन्तर्मन से भारतीय होता है तब उसे हिन्दू मुस्लिम जैसे किसी टैग की आवश्यकता नहीं रहती किन्तु यह बात मैंने इसलिए लिखी क्योंकि नेट पर आए गए किसी न किसी बात पर मुस्लिम चिंतकों लेखकों द्वारा भारत के विरुद्ध आग उगली जाती रहती है। मुझे तब अपार कष्ट हुआ जब मैंने देखा कि ऐसे ही कई लेखक भारतीय सैनिकों की हत्या-सरकशी पर पाकिस्तान का पक्ष ले रहे थे.! खुद जागरण पर ही मैंने एक लेख देखा…. आप जैसे राष्ट्रप्रेमियों पर गर्व होता है। लेखन बनाए रखिए। मेरी तरफ से इस कविता के लिए 5 में से 5……..

    shashibhushan1959 के द्वारा
    January 20, 2013

    इस बात पर तो मेरी तरफ से भी हार्दिक बधाई ! मेरे अभिन्न मित्र भी मुस्लिम ही हैं,. मंसूर भाई ! हमारे उनके परिवार के मित्रता की यह तीसरी पीढ़ी चल रही है !

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    वासुदेव जी, मैं आपकी बात से सहमत हूँ. पाकिस्तान के पक्षधरों को हिंदुस्तान में रहने का कोई अधिकार नहीं. “हिन्द है मेरे दिल की धड़कन, हिंदी मेरी पहचान. मेरे तन के रोम रोम में बसा है हिंदुस्तान.. धन्यवाद्………………….. आभार…………..

chaatak के द्वारा
January 19, 2013

जय हो !!!!!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    चातक जी, नमस्कार, प्रतिक्रिया के लिए आभार………

yogi sarswat के द्वारा
January 19, 2013

तूँ किस खेत की मुली पाकिस्तान, तुझे सबक पुनः सिखलाएंगे. एक बार फिर इतिहास ७१ का, इस दुनियां में दोहराएंगे.. तूँ मान नहीं तो मनवा लेंगे, तुझको जिंदा दफना देंगें. तूँ पैर हटा एल ओ सी से, नहीं पैर तेरा कटवा देंगे.. हम हैं उदार कायर न समझ, हम संतो की संतानें है. मातृभूमि पर मरने वाले, हम मौत के वो परवाने हैं.. बहुत सही कहा आपने ! श्री अंकुर जी ! पाकिस्तान को ये लगता है जैसे हमारे नेताओं का प्खॊन , पानी हो गया है ऐसे ही हर हिंदुस्तानी का खून अब पानी हो गया है ! लेकिन उसे याद कर लेना चाहिए १९७१ को ! हम ही हैं जिसने उसे उसकी औकात दिखाई थी ! बहुत सुन्दर शब्द

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    योगी जी, नमस्कार! आपका कोटिश आभार…………

shashibhushan1959 के द्वारा
January 19, 2013

आदरणीय अंकुर जी, सादर ! “”खून का बदला खून से लेंगे, इतिहास लहू से लिख देंगें. तूने काटा है एक शीश, बदले में हम सौ- सौ लेंगे.. हे नादान संभल नहीं तो, करनी पर पछतायेगा. काश्मीर के चक्कर में, लाशें गिनता रह जायेगा..”" जोश और ललकार भरी इस रचना के लिए बधाई ! पर हमारे हुक्मरान कब जागेंगे, पता नहीं ?

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    आदरणीय गुरु जी, प्रणाम! निरंतर उत्साहवर्धन के लिए आभार…………

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 18, 2013

स्नेही अंकुर जी जानदार चेतावनी बधाई

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    आदरणीय प्रदीप सर, प्रणाम! प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
January 18, 2013

हनीफ जी, बेहतरीन देश भक्ति की कविता के लिए बधाई!

    Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
    January 23, 2013

    जवाहर जी, नमस्कार! आपका आभार………


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