कड़वा सच ......

सत्य कहने से अभी तक डरा नहीं है / घाव गहरा है अभी तक भरा नहीं है // लाख पैरों तले कुचला गया "अंकुर" ज़माने के सत्य से जन्मा है, इसलिए मरा नहीं है //

23 Posts

664 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10082 postid : 801624

पथ सृजित अपना करो....

Posted On: 9 Nov, 2014 Others,social issues,कविता में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

तुम नवांकुर से, सुद्रण तरु का,
ग्रहण संकल्प लेकर,
पथ सृजित अपना करो,
आगे बड़ो, द्रनता लिए,
संबल बनो तुम आत्म के,
उन्नति शिखर की ओर -
एकाकी चलो,
निर्माण अपना मार्ग,
अपने आप हो.
धैर्य की पूंजी ,
न कष्टों में कहीं तुम खर्च करना,
ज़िन्दगी से जूझना, लाचारिओं को तुम हराना.
तुम सदा मकशद लिए आगे बड़ो.
डगमगाएं पैर तो-
बैशाखिओं का लो सहारा,
जो की हिम्मत और द्रनता से बनी हो.
ज्वर उठता सिन्धु में तरनी उछलती और गिरती,
किन्तु नाविक जूझता हारे बिना पाता किनारा.
शक्ति और विवेक बल पर.
तुम मनुज हो,
जानते हो-
हर ख़ुशी क्रय की नहीं जाती कभी भी,
शक्ति से उस पर विजय पाते मनुज द्रण.
का पुरुष तो-
सहज- सरल- सुबोध पथ के पक्षधर बन,
कूप-कच्छप बन
उसी को विश्व सारा मानते है.
किन्तु-
वीरों के लिए ,
संघर्ष का पथ सहज पथ है.
मुश्किलें,
आनंद का पर्याय बनती.
इसलिए तुम मान लो यह,
ज़िन्दगी संघर्ष का पर्याय है,
म्रत्यु भी हमको न सकती मार यदि,
पास में संघर्ष मात्र उपाय है.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 12, 2014

श्री हनीफ जी भाव पूर्ण बहुत सुंदर कविता मुश्किलें आनन्द —-पास में संघर्ष मात्र उपाय है अति सुंदर भाव डॉ शोभा


topic of the week



latest from jagran